Please do not search any story behind this poem... better u use ur imagination to feel it.
एक पत्थर था दो आँसू थे
एक ख्वाब सुहाना पलता था,
हर पल मे खुशियाँ रह्ती थीं
हर पल एक नया सितारा था।
एक ख्वाब सुहाना पलता था,
हर पल मे खुशियाँ रह्ती थीं
हर पल एक नया सितारा था।
महसूस नही तुम कर पाये
वो मोम जो कभी पिघलता था,
तुम उसके आजीवन ॠणी
हर साँस मे तुमको जीता था।
वो मोम जो कभी पिघलता था,
तुम उसके आजीवन ॠणी
हर साँस मे तुमको जीता था।
वो इतने भोले कैसे थे
वो इतने सच्चे कैसे थे
जो याद करे तो रोता है
वो कैसा टूटा तारा था।
वो इतने सच्चे कैसे थे
जो याद करे तो रोता है
वो कैसा टूटा तारा था।
निर्मल निश्छल पावन धरती
प्यार सभी को बाँटे है,
वो पागल बादल आवारा
कब समझा था कब समझा है?
एहसास नहीं इस दर्द का
क्यों दूर किनारे रह्ते है
आजीवन अपने सपनों में
वो उसको पूजा करते है।
प्यार सभी को बाँटे है,
वो पागल बादल आवारा
कब समझा था कब समझा है?
एहसास नहीं इस दर्द का
क्यों दूर किनारे रह्ते है
आजीवन अपने सपनों में
वो उसको पूजा करते है।
जीवन की इन राहों मे कितने हीं राही मिलते हैं
कुछ पाने को कुछ खोने को कितने ही सपने पलते हैं,
क्या पाया उसका पता नही क्या खोया उसका पता नही
जो प्यार मिला था उसे कभी संजोये आजे बढता है॥
कुछ पाने को कुछ खोने को कितने ही सपने पलते हैं,
क्या पाया उसका पता नही क्या खोया उसका पता नही
जो प्यार मिला था उसे कभी संजोये आजे बढता है॥
3:45PM
Sep 12, 2008
Sep 12, 2008
1 comment:
Your first poem says a loads of things. It says that a potential poet lies inside you. You only need to nurture it.U keep on writing then better poem will come out.
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